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बीजेपी भले ही रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति बनाकर खुश हो लेकिन इसके पीछे का सच कुछ और ही है ?

Written by Alina Sheikh

रामनाथ कोविंद की जीत के बाद भाजपा काफी उत्साह में हैं और उसे लगता है कि उसे अब कोई हरा नही सकता लेकिन आपको बता दें कि इंडिया टुडे ग्रुप के डेली ओ में राष्ट्रपति चुनाव के फिक्स होने की बात बताई जा रही है. वैसे इस तथ्य के पीछे उनके अपने तर्क हैं कि जिस तरीके से ये चुनाव हुआ उसको देखते हुए इस वेबसाइट ने इस चुनाव को फिक्स की श्रेणी में रखा है. रामनाथ कोविंद को लगभग 66% वोट मिले थे जिसके जवाब में मीरा कुमार जोकि विपक्ष की उम्मीदवार थीं उन्हें 33% वोट मिले थे. हालाँकि ये जीत मोदी और अमित शाह के लिए जरूर मायने रखती होगी लेकिन तमाम बुद्धजीवियों का मानना है कि इस चुनाव में वैसा कुछ नही देखने को मिला जिससे लोकतंत्र का मान रखता हो.

आपको बता दें कि इस वेबसाइट में राष्ट्रपति चुनाव के बारे में लिखा गया है कि ‘इस चुनाव में पहले से ही सारे वोट फिक्स थे कि कौन किसको वो करेगा, और नामांकन के पहले ही तय माना जा रहा था कि ये चुनाव रामनाथ कोविंद ही जीतेंगे तो फिर ये चुनाव कैसे हुआ. जिस तरीके से लोकतंत्र की पहचान है भारत को लेकर उसको देखते हुए चुनाव नही सिर्फ खानापूर्ति ही हुई.’

अगर इस वेबसाइट की माने तो सुप्रीम कोर्ट के वकील राजीव धवन के लेख में बताया गया है कि ‘इस चुनाव में लोकतंत्र को धक्का लगा है और ये भारत के लोकतंत्र को धराशायी कर देगा. चुनाव के पहले ही ये तय हो चुका था कि जीत किस उम्मीदवार की होगी तो फिर चुनाव का क्या मतलब रह गया.’

फ़िलहाल इसके इतर बात करें तो रामनाथ कोविंद संघ से जुड़े हुए हैं और ऐसे में माना जा रहा है कि जिस तरीके से RSS भारतीय राजनीति में पाँव पसार रहा है उसको देखते हुए तो यही लगता है कि देश में कट्टरता अभी और बढ़ेगी. मोदी सरकार एक तरफ दावा करती है कि देश की विकास की तरफ बढ़ रहा है लेकिन हर दिन हिंसा की खबरे आ रही हैं और निर्दोषों की जान चली जाती है. मोदी न तो आतंकवाद पर लगाम पा रहे हैं और न ही देश के अंदर हो रही हिंसा पर.

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