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रामनाथ कोविंद के शपथ लेने वाले दिन ही बीजेपी और RSS के दलित विरोधी होने की खुल गयी पोल!

Written by Alina Sheikh

देश के तीन बड़े पदों पर संघ से जुड़े हुए लोगों के काबिज होने पर देश में असंतुलन बन गया है, और संघ की सोच भी हावी हो रही है. आपको बता दें कि नए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अपने पहले ही दिन संघ वाली मानसिकता का परिचय देते हुए दलितों को नाराज कर दिया है. वैसे राष्ट्रपति तो सभी का होता है लेकिन जिस तरीके से शपथ वाले दिन रामनाथ कोविंद ने किया उससे तो यही लगता है कि यह सरकार अब दलित विरोधी होने का पूरा सबूत दे रही है और राष्ट्रपति को भी संघ की मानसिकता पर चलने के लिए इशारा कर रही है. आपको बता दें कि अपने पहले ही दिन रामनाथ कोविंद ने कुछ ऐसा कर दिया कि सोशल मीडिया पर काफी चर्चा हो रही है.

देश के 14वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ तो ली लेकिन सबको सामान भाव से देखने वाली मानसिकता से दूरी बना ली. दरअसल शपथ लेने से पहले रामनाथ कोविंद राजघाट जाकर महात्मा गाँधी को फूल चढ़ाये और संसद भवन की तरफ निकल पड़े. संसद भवन जहां उनका शपथ होना था, इस दौरान वो शपथ तो ले लिए लेकिन उसके पहले उन्होंने संविधान के निर्माता को याद करना जरुरी नही समझा.

आपको बता दें कि संसद भवन में स्थित संविधान निर्माता डा. भीमराव अम्बेडकर की मूर्ति पर फूल चढ़ाना जरुरी नही समझा. जिसपर मायावती ने कहा “अच्छा होता कि कोविंद जी बाबा साहेब को याद करके उनकी मूर्ति पर भी फूल चढ़ा देते तो दलितों का भी सम्मान हो जाता. बाबा साहेब को जिस तरीके से भुलाया जा रहा है वो मोदी सरकार की सोच को जाहिर करता है.”

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मायावती ने ये भी कहा कि “रामनाथ कोविंद आज बाबा साहब की वजह से ही राष्ट्रपति बने हैं और ऐसे में उन्हें ही भूल जाना उनकी सोच पर संघ की मानसिकता हावी होना दिखाई देता है. बाबा साहब की वजह से एक दलित आज राष्ट्रपति बन पाया है या फिर कांशीराम जी का बहुत बड़ा योगदान है लेकिन रामनाथ कोविंद दलितों का नही बल्कि संघ और बीजेपी का विकास करने आये हैं और उन्ही की विचारधारा को आगे बढ़ा रहे हैं. अच्छा होता कि वो बाबा साहब का भी सम्मान करते.”

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