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मोदी सरकार ने पूर्व राष्ट्रपति कलाम जी की प्रतिमा के साथ जो किया वो बहुत ही घिनौना है !

Written by Alina Sheikh

भारत के पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम जिनका देश में हर कोई सम्मान करता है, उनकी सादगी की लोग पूजा करते हैं और उन्हें अपना आदर्श मानते हैं. वैसे तो कलाम जी पूरे देश के थे लेकिन बीजेपी उन्हें राष्ट्रपति बनाकर अपना बनाकर ये सोचती है कि कलाम उन्हें हैं और इस जरिये से वो मुसलमान वोटो को लुभाने की कोशिश करती है. कलाम साहब को लेकर अभी एक ताजा विवाद छिड़ गया है और उसकी वजह बीजेपी है. पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की 27 जुलाई, 2017 को दूसरी पुण्यतिथि थी. इस मौके पर तमिलनाडु के रामेश्वरम में कलाम की एक प्रतिमा का अनावरण किया गया था.

कलाम जी ई इस प्रतिमा पर विवाद हो गया है. दरअसल लकड़ी से बनी इस प्रतिमा में कलाम को वीणा बजाते दिखाया गया है. वीणा हिन्दू धर्म के एक देवी देवताओं का वाद्य यन्त्र है और यही नही वीणा के साथ-साथ उनकी प्रतिमा के पास भगवत-गीता भी रखा गया था जिसके बाद विवाद शुरू हो गया है. इस प्रतिमा का का अनावरण खुद ने पीएम मोदी ने किया था.

जब ये मामले ने तूल पकड़ा तो कालम जी की प्रतिमा के पास आनन-आनन में कुरान और बाइबल भी रख दिया गया.  आपको बता दें कि कलाम जी की याद में एक स्मारक बनाया गया है और ये स्मारक वही बनवाया गया है जहाँ उन्हें दफनाया गया था. इस स्मारक को पीएम ने पूर्व राष्ट्रपति के गृह नगर में 27 जुलाई को देशवासियों को समर्पित किया.

16 करोड़ रुपये खर्च करके तैयार की गयी इस प्रतिमा को एक साल में तैयार किया है लेकिन जिस तरीके से मोदी सरकार कलाम जी को एक विशेष समुदाय से जोड़ रहे हैं वो ठीक नही है. एमडीएमके नेता वाइको ने बीजेपी पर आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी कलाम को भगवा रंग में रंगने की कोशिश कर रही है. इस मामले को जब मीडिया ने उठाया तो मजबूर होकर मोदी सरकार और उनके सहयोगियों को इस प्रतिमा के पास दूसरे धर्मों से भी जोड़ने वाली चीजें रखी गयी.

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