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खुल गई नरेंद्र मोदी की पोल, सामने आया सबसे बड़ा घोटाला

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प्रधानमंत्री मोदी ने देश में मीडिया पर प्रचार खरीदने के लिए सौ दो सौ करोड़ रुपये नहीं, पूरे 11 अरब रुपये से ज्यादा खर्च किए. मीडिया को बिकाऊ कहने वाले बीजेपी के समर्थकों के लिए ये खबर झटका देने वाली हो सकती है. आरटीआई के मुताबिक ये जानकारी सामने आई है. नोटबंदी को लेकर विपक्ष के कठघरे में खड़ी भाजपा सरकार इस खुलासे के बाद और घिर सकती है. आरटीआई के मुताबिक मोदी सरकार ने पिछले ढाई सालों के भीतर अपने प्रचार-प्रसार पर 11 अरब रुपए से ज्यादा खर्च किए हैं.

ग्रेटर नोएडा के आरटीआई एक्टिविस्ट रामवीर तंवर ने 29 अगस्त 2016 को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से सूचना के अधिकार के जरिए पूछा था कि केंद्र में प्रधानमंत्री मोदी ने सरकार बनाने से लेकर अगस्त 2016 तक विज्ञापन पर कितना सरकारी पैसा खर्च किया है. तीन माह बाद जब आरटीआई के जरिए मिले इस जवाब को देखकर आप जरूर चौंक जाएंगे. इसमें बताया गया है कि पिछले ढाई साल में मोदी सरकार ने विज्ञापन पर ग्यारह अरब रुपए से भी ज्यादा खर्च कर चुकी है.

आरटीआई के जरिए मंत्रालय से मिले विज्ञापन की जानकारी में बताया गया कि ब्रॉडकास्ट, कम्युनिटी रेडियो, इंटरनेट, दूरदर्शन, डिजिटल सिनेमा, प्रोडक्शन, टेलीकास्ट, एसएमएस के अलावा अन्य खर्च शामिल हैं. इनमें पिछले तीन सालों में मोदी सरकार की ओर से करीब ग्यारह अरब से भी ज्यादा रुपया खर्च किया गया है.

प्रचार प्रसार के इन माध्यमों पर किया गया इतना खर्च

SMS

2014 – 9. 07 करोड़

2015 – 5.15 करोड़

अगस्त 2016 तक – 3. 86 करोड़

इंटरनेट

2014 – 6. 61 करोड़

2015 – 14.13 करोड़

अगस्त 2016 तक – 1.99 करोड़

ब्राडकास्ट

2014 – 64. 39 करोड़

2015 – 94.54 करोड़

अगस्त 2016 तक – 40.63 करोड़

कम्युनिटी रेडियो

2014 – 88.40 लाख

2015 – 2.27 करोड

अगस्त 2016 तक – 81.45 लाख

डिजिटल सिनेमा

2014 -77 करोड़

2015 – 1.06 अरब

अगस्त 2016 तक – 6.23 करोड़

टेलीकास्ट

2014 – 2.36 अरब

2015-2.45 अरब

अगस्त 2016 तक – 38.71 करोड़

प्रोडक्शन

2014 – 8.20 करोड़

2015 – 13.90 करोड़

अगस्त 2016 तक -1.29 करोड़

तीन साल में हर साल इतना किया खर्च

2014 – एक जून 2014 से 31 मार्च 2015 तक करीब 4.48 अरब रुपए खर्च

2015 – 1 अप्रैल 2015 से 31 मार्च 2016 तक 5.42 अरब रुपए खर्च

2016 – 1 अप्रैल 2016 से 31 अगस्त 2016 तक 1.20 अरब रुपए खर्च

इस मामले पर आरटीआई एक्टीविस्ट रामवीर तंवर ने कहा कि सुना करते थे कि मोदी चाय के पैसे भी खुद दिया करते थे. ऐसे में मन में विज्ञापन को लेकर सवाल उठने पर आरटीआई लगाई थी. अंदाजा ये था मोदी के विज्ञापनों पर 5 से 10 करोड़ रुपए का खर्चा किया होगा. लेकिन, ढाई साल में 1100 करोड़ रुपए खर्च करने का पता लगने के बाद से निराशा महसूस हुई है. उन्होंने कहा कि जब ढाई साल में 1100 सौ करोड़ का खर्च आया है केवल विज्ञापन पर तो पूरे पांच साल में मोदी जी के विज्ञापनों पर 3000 हजार करोड़ का खर्च आ सकता है. इसकी तुलना उन्होंने अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भी की और कहा कि वहां सरकार के चुनाव प्रचार में 800 करोड़ रुपए खर्च किए हैं. जबकि हमारे देश में एक केंद्र सरकार इतना पैसा खर्च कर दिया ये बहुत ही निंदनीय है.

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