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पतंजलि के पूर्व सीईओ ने किया बड़ा खुलासा, गाय के नाम पर बाबा भक्तों का कैसे काट रहे

Written by Nazia

योग गुरु बाबा रामदेव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छतरछाया में अपने पतंजलि के व्यापार को इतना बढ़ा लिया है कि आने वाले समय में रामदेव का नाम देश के नामी उद्योगपतियों में से एक होगा. हाल ही में एक सर्वे आया था जिसमें बाबा रामदेव देश के अमीर उद्योपतियों की सूची में शामिल हो गए थे. पतंजलि के नाम पर चल रहा बाबा रामदेव का व्यापार इतना आगे है कि वहां ऐसी हर चीज़ उपलब्ध है जो इंसान की डेली नीड्स में शामिल है.

बाबा रामदेव देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी अपनी धाक जमाए हुए हैं। उनके योग और उसके माध्यम से रोगों को छू-मंतर करने का लोहा भी सभी ने माना है। यही कारण है कि जनता का उनपर अटूट विश्वास है। इतना ही नहीं उन्हें आयुर्वेदिक पद्धतियों को पुनर्जीवन देने का श्रेय भी मिलता है। ऐसे में उन्होंने आयुर्वेद के रास्ते देशी नुस्खों के साथ लोगों को स्वदेशी माल अपनाने के लिए प्रेरित किया और खुद ही स्वदेशी माल निर्माता बन गए।

पतंजलि के पूर्व सीईओ एसके पात्रा ने खुलासा किया है कि रामदेव का प्रसिद्ध ‘गाय घी’ असल में गाय का घी है ही नहीं। उन्होंने बताया कि रामदेव का यह देसी घी असल में सफेद मक्‍खन से बनता है जो कि कई जानवरों के दूध से बनता है, सिर्फ गाय के नहीं। इसके लिए देश के विभिन्‍न हिस्‍सों से छोटे-बड़े उत्‍पादकों से दूध लिया जाता है।

किसे क्या पता यह घी गाय का है या बकरी का
यह संस्‍था राज्‍य के 22,000 गांवों के 23 लाख उत्‍पादकों से दूध संग्रह करती है, मगर इस आधार पर नहीं कि वह गाय का है या भैंस का, या फिर बकरी का। पात्रा कहते हैं, रामदेव दावा करते हैं कि यह सब गाय का घी है, लेकिन किसे पता है कि यह गाय का घी है या भैंस का घी है या फिर बकरी का।

ख़ास तो यह है कि बाबा रामदेव को भी नहीं पता कि पतंजली टैग के साथ बाजार में बिकने वाला देशी घी आखिर किस जानवर के दूध से बना हुआ है। इस बात का वे चाह कर पता भी नहीं लगा सकते, लेकिन देशी के नाम पर 1500 करोड़ का कारोबार तो बन ही गया है।

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