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अगर मोदी में शर्म बाकी है तो सामने आकर ताल ठोककर माफी मांगे नही तो..

Written by Kumar

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट 2016-17 बुधवार को जारी की है। आरबीआई की यह रिपोर्ट सरकार के नोटबंदी के लिए किए दावे को पूरी तरह से फेल करती है। आरबीआई ने अपनी रिपोर्ट में बताया गया कि नोटबंदी के दौरान 1000 रुपए के 632.6 करोड़ नोटों में से 8.9 करोड़ रुपए जमा नहीं हो सके। नवंबर 2016 में नोटबंदी के समय करीब 15.4 लाख करोड़ रुपए मूल्य के 500 और 1000 के नोट चलन में थे। इनमें 44%  नोट 1000 रुपए की थी। 56% 500 रुपए के नोट की थी। 1000 रुपए की बात करें तो इसके 670 करोड़ नोट चलन में थे। यानी 6.70 लाख करोड़ रुपए। आरबीआई ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि एक हजार रुपए के 8.9 करोड़ नोट यानी 8900 करोड़ रुपए बैंकों में नहीं लौटे। यानि नोटबंदी के बाद हजार रुपए के 670 करोड़ नोटों में से सिर्फ 1.3% नोट बैंकों में जमा नहीं हुए।

 

 

सरकार ने यह कहकर नोटबंदी की थी कि इससे जाली नोट सर्कुलेशन से बाहर होंगे और ब्लैकमनी बंद होगी। लेकिन आरबीआई की रिपोर्ट इस ओर इशारा कर रही है कि नतीजे वैसे नहीं आए। क्योंकि बंद हो चुके हजार रुपए के 98.7% नोट तो आरबीआई के पास लौट आए हैं।नोटबंदी के बाद करीब 7,62,072 जाली नोट मिले। जिनमें 317,567 नोट 500 रुपए के थे। 2,56,324 नोट 1000 रुपए के थे जो जाली मिले हैं।

 

वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने ट्विट किया कि क्या नोटबंदी कालेधन को सफेद करने के लिए किया गया।

 

नकली नोटों न छपे इसलिए बढ़ाए थे सिक्युरिटी फीचर लेकिन नहीं आए काम

नोटबंदी के बाद 500 और 2000 रुपए के जो नए नोट चलन में आए उनमें सिक्युरिटी फीचर्स पर बहुत जोर दिया गया। जिसके कारण नोटों की छपाई का खर्च भी बढ़ा। नए नोटों की छपाई से लेकर डिस्ट्रिब्यूशन में आरबीआई को करीब 7965 करोड़ रुपये का खर्च आया। नोटबंदी के बाद नई करंसी के रूप में 500 और 2000 रुपए के नए नोट नकली नोट भी मिले। 500 रुपए के 199 नोट और 2000 के 638 नोट भी नकली मिले हैं। आरबीआई की वार्षिक रिपोर्ट सरकार के लिए सिर दर्ज साबित हो सकती है। क्योंकि ये सरकार के सभी दावों को हवा में उठा रही है। आरबीआई की रिपोर्ट के बाद सोशल मीडिया में सरकार की आलोचना भरे पोस्ट शेयर हो रहे हैं। सीपीआई ने लिखा कि आरबीआई की रिपोर्ट सरकार की फेल होने की रिपोर्ट है।

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