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पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या का मामला पहुंचा अमेरिका !

Written by Alina Sheikh

कन्नड़ पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या को लेकर देशभर में प्रदर्शन तो ही रहे हैं लेकिन इसकी गूंज अब विदेशों से भी आ रही है. राष्ट्रवाद के नाम पर लोगों को खामोश कर देने का यह घिनौना काम कहाँ तक सही है? आखिर जो भी इस कट्टरवादी सोच की आलोचना करता है या तो उसकी जमकर फजीहत हो जाती है या तो उसे मार दिया जाता है. गौरी लंकेश भी इसी का शिकार हुईं. वो हिन्दुत्ववादी रजनीति की घोर आलोचक थीं और विरोधियों को ये पसंद नही आया. जिस तरीके से सोशल मीडिया पर मोदी और उनके कारनामों को लेकर फेक खबरे चलायी जाती है उसी को लेकर गौरी लंकेश ने अपने अंतिम लेख में भक्तों की पोल खोली थी, जिसका अंजाम सामने है.

बता दें कि अमेरिकी दूतावास ने बुधवार को वरिष्ठ कन्नड़ पत्रकार-सामाजिक कार्यकर्ता गौरी लंकेश की हत्या की जमकर निंदा की. यहीं नही अमेरिकी दूतावास की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया है कि, “प्रेस की आजादी के समर्थकों के साथ मिलकर हम सम्मानित पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या की निदा करते हैं. हम सुश्री लंकेश के परिवार, मित्रों व सहयोगियों के साथ संवेदना प्रकट करते हैं. ऐसी घटनाएं नही होनी चाहिए, इससे मीडिया की आज़ादी पर सवाल उठता है.” बता दें कि गौरी लंकेश अपने कार्यालय से घर लौटी ही थीं कि उन्हें तीन अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी, उनकी उम्र 55 साल थी.

लंकेश लोकप्रिय कन्नड़ टेबलॉयड ‘लंकेश पत्रिके’ की संपादक थीं, और साप्रदायिकता के खिलाफ लिखा करती थीं. उनकी हत्या के विरोध में 6 सितम्बर को पूरे कर्नाटक में ही नही बल्कि देशभर में प्रदर्शन हुए. विरोध प्रदर्शन कर रही भीड़ में पत्रकार, कार्यकर्ता, लेखक, चिंतक और महिला संगठनों के कार्यकर्ता शामिल हैं. मौन विरोध प्रदर्शन कर लोगों की तख्तियों पर लिखा था, “आप किसी शख्स की हत्या कर सकते हैं, उसके विचारों की नहीं.” इस मामले में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गाँधी ने कहा कि “जो भी भाजपा के खिलाफ बोलता है, उसे चुप करा दिया जाता है.”

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