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कांग्रेस के इस चाल के बाद हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में मुसीबत में पड़ सकती है बीजेपी!

Written by Nazia

हिमाचल प्रदेश में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस इस बार खासा हरकत में नजर आ रही है. हिमाचल प्रदेश कांग्रेस सुप्रीमो वीरभद्र सिंह इस चुनाव में ऐसी रणनीति के साथ चुनाव लड़ने वाले है जिससे भारतीय जनता पार्टी को झटका लग सकता है.

 

दरअसल प्रदेश के छः बार मुख्यमंत्री रह चुके वीरभद्र सिंह इस बार ऐसी सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं जहाँ पिछले एक दशक से बीजेपी का राज रहा है. हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह 2017 का विधानसभा चुनाव अर्की निर्वाचन छेत्र से लड़ने की तैयारी में हैं. जिसके लिए उन्होंने नामांकन भी दाखिल कर दिया है. वर्तमान में अर्की विधानसभा में कुल 84, 834 मतदाता हैं. अर्की विधानसभा में 1993 से 2003 तक कांग्रेस का राज रहा है. लेकिन 2007 के बाद हुए विधानसभा चुनावों में जनता ने बीजेपी को चुना हैं.

 

2017 के विधानसभा चुनाव में अर्की विधानसभा का खासा महत्व है. क्योंकि यहाँ के मतदाता चुनाव को लेकर बेहद ही सक्रिय रहते हैं. सरकार के काम काज को ध्यान में रखते हुए किसी भी पार्टी के सरकार को बनाने और गिराने का बूता रखते हैं.


50 साल से कोई चुनाव नहीं हारे

अपने 50 साल के राजनितिक सफ़र में वीरभद्र सिंह ने कुल 13 चुनाव लड़ा है और सभी में जीत दर्ज की हैं. सिंह अपनी राजनीतिक सफ़र में आठ बार विधायक, छह बार मुख्यमंत्री और पांच बार के लोकसभा सांसद चुने गए हैं. सिंह के इस रिकॉर्ड को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि बीजेपी के लिए यह किसी खतरे की घंटी से कम नहीं है. हालांकि कांग्रेस के इस रणनीति को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी भी हरकत में आ गई है. बीजेपी ने वीरभद्र सिंह के इतिहास को देखते हुए ही मौजूदा विधायक गोविंद राम शर्मा का पत्ता काटकर रत्न पाल सिंह को वीरभद्र सिंह के खिलाफ मैदान में उतार दिया है.
आपको बतादें कि हिमाचल प्रदेश में आगामी 9 नवंबर को विधानसभा चुनाव होने है. वहीँ वोटों की गिनती 18 दिसंबर को होगी.

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